Poem on Clouds in Hindi बादलों पर कविता

Poem on Clouds in Hindi

बादल
दूर देश से आये बादल
आसमान पे छाये बादल
ताने ऊंची छतरी काली
चारों ओर इतराये बदल।

सागर से भर गागर अपनी
सबकी प्यास बुझाये बदल
बूंद -बूंद टपका धरती पर
मंद -मंद मुस्काए बादल।

संग हवा के नाचे गए
बिजली भी कड़काये बादल।

आपस में टकरा -टकरा के
धूम -धड़ाका नचाये बादल।

नाचे जब धरती पर मयूर
झूम -झोंके गाये बादल
क्यारी -क्यारी बाग़ बगीचे
सबके मन को भाए बादल।

टर्र -टर्र सुनके मेंढक की
दल -बल अपना लाये बादल
बदल -बदल के रूप सलोना
सबको खूब रिझाये बादल।

लेखक – गोबिंद भारद्वाज


सूरज भी जब छुप जाता है आसमान में,

घने बादलों का डेरा सा लग जाता है।

बादलों की धमाचौकड़ी जब मचती है ,

तो आकाश खेल का मैदान बन जाता है।
काले, भूरे, सफेद, चमकीले बादल,
अठखेलियां सी करते दिखते हैं।
लगता है जैसे कोई छीटे शरारती बच्चे।,
मिलकर वहां उपर लूकन छुपी खेलते हैं।
मानसून में यहीं बदल गंभीर हो जाते हैं,
वर्ष करने के अपने काम में जुट जाते हैं
गर्मी की जलती -तपती धूप, लू से
यहीं बदल हमें राहत पहुंचाते हैं। – ओम प्रकाश बजाज 


रिमझिम बरस रहा बादल 

आसमान में बादल सावन की घटा छा रही
बरसा रहा बारिश की बूंद
बाल मन को भा रही
आसमान में उमड़ा बादल
उजले और काले काले बादल
जीव जंतु परिंदे वी
एक स्वर में गा रहे
चिड़िया भी देखो गा रही
झींगुर भी राग सुना रही
सबकी मन से एक आवाज
पानी को याद सता रही
अपनी प्यास बुझाने को
सब मन ही मन गा रहे
सावन की हरियाली देख
रिमझिम रिमझिम बरस रहा बादल

नीतीश कुमार


Short poem on Clouds Hindi

आसमान मे बादल आये
उमड़ -घुमड़ कर
चंचल मन को हर्षाये
बरस -बरस कर चिड़िया
भी गए रही है

चीं -चीं कर फूलों की
कलियां भी मुस्करायी
खिल -खिल कर आसमान
में बादल आये।

सज -सवर कर
रिमझिम -रिमझिम
बारिश हुई
टपक टपक कर
कागज की नाव चले
डगमग -डगमग
बच्चे भी झूम उठे

छपक -छपक कर
आसमान में बादल आये
उमड़ -घुमड़ कर
सारा -जग खिल उठा
सज -संवर कर

लेखक – नितेश कुमार सिन्हा


Poem – 3 बादल की शैतानी 

मां क्या बादल भी
करता आना -कानी
मेरी तरह वह भी
बात -बात पर करता शैतानी
मां क्या बादल रोज
सुबह -सबेरे स्कूल जाता है
मेरी तरह वह भी होमवर्क
पूरा करता है।
मां क्या बादल को रोज
परियां सुनाती है कहानी
मेरी तरह वह भी
करता है नींद में मनमानी
मां क्या बादल गुस्से में
तोड़ -फोड़ शोर मचाता है
मेरी तरह वह भी डांट पर
गरजने लगता है।

लेखक – मुनटुन राज